रात रुको गणपत सवेरे चले जाना
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०४
दौड़ी-दौड़ी जाऊं मैं माली की दुकान पे, अभी हमने फूल मंगाए नहीं है-०२
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०२
दौड़ी-दौड़ी जाऊं मैं मिठाई की दुकान पे, अभी हमने मोदक मंगाए नहीं है-०२
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०२
दौड़ी-दौड़ी जाऊं मैं बजाज की दुकान पे, अभी पीताम्बर मंगाया नहीं है-०२
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०२
दौड़ी-दौड़ी जाऊं मैं पनवाड़ी की दुकान पे, अभी हमने पान मंगाया नहीं है -०२
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०२
और इस भजन को भी देखें: तेरी दीवानी बप्पा दुनिया
दौड़ी-दौड़ी जाऊं मैं भक्तों के घर में, अभी हमने भजन सुनाया नहीं है-०२
रात रुको गणपत सवेरे चले जाना अभी हमने जी भर के देखा नहीं है-०२

