शिव बैरागी

  • Shiv Bairagi

जटा में जिनकी गंगा माई,
गर विषधर के माला बा,
शिव के पाई उहे जेकर, मन बन गइल शिवाला बा,
मन बन गइल शिवाला बा।

शिव बैरागी शिव अनुरागी, शिव शक्ति के संचार हवें-०२
सब आदि अनादि शिव से बा, शिव जग के तारण हार हवें,
शिव बैरागी शिव अनुरागी, शिव शक्ति के संचार हवें।

शिव कइले पान हलाहल के, रक्षा कइले थल नव जल के,
करुणा के सागर शिव हउएं, बन जा ले ते शिव बल निर्बल के,
शिव हीं गंगा के धार हवें, शिव मोक्ष हवें संहार हवें,
सब आदि अनादि शिव से बा, शिव जग के तारण हार हवें।

देवन के शिव दानव के शिव, पशु के शिव पशुपति नाथ हवें,
मानव में महिमा मंडित बा, छवि भोला भोलेनाथ हवें,
परमार्थ में शिव अवसाद में शिव, हर रोग के शिव उपचार हवें,
सब आदि अनादि शिव से बा, शिव जग के तारण हार हवें।

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विष्णु के सुदर्शन शिव हउएं, गीता के दर्शन शिव हउएं,
बिट्टुआ मनोहर जग जाने, नव ग्रह के घर्षण शिव हउएं,
शिव में समाहित सृष्टि बा, शिव पतरी में उजियार हवें,
सब आदि अनादि शिव से बा, शिव जग के तारण हार हवें।


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