सावन में भोलेनाथ
शंकरा शंकरा,
शंभू शिव शंकरा।
तुम हीं बसे हो घट घट में,
कभी काशी कभी कैलाश जी, काशी कभी कैलाश जी,
तुमसे हीं ये सृष्टि है, ये धरती और आकाश जी धरती और आकाश जी,
तुम्हीं आदि तुम्हीं अनंत, रहते सदा भूतों के संग,
आदि देव महादेव रहते, हर रूप में रहते मेरे साथ जी,
सावन में रहते हैं मस्त मगन, मेरे भोलेनाथ जी-०२
हरिद्वार केदार में, गंगा वाली धार में,
तुम हीं नजर आते मुझे शम्भू, तीन लोक संसार में,
हरिद्वार केदार में, गंगा वाली धार में,
तुम हीं नजर आते मुझे शम्भू, तीन लोक संसार में,
डमरू की धुन मन भाये, मन गाये नमः शिवाय,
हे अविनाशी कैलाशपति, दिल तेरा नाम दोहराये,
उमापति तुम अंतर्यामी, तीन लोक के तुम हो स्वामी
भक्तों के माथे पर रहता, बाबा तेरा हाथ जी,
सावन में रहते हैं मस्त मगन, मेरे भोलेनाथ जी-०२
ठंढी ठंढी हवाएं, बरखा काली काली घटायें,
सावन में मेरे शम्भो नाथ, अमृत धारा बरसायें,
ठंढी ठंढी हवाएं, बरखा काली काली घटायें,
सावन में मेरे महादेव, अमृत धारा बरसायें,
भांग धतूरा चढ़ाये, कोई कांवड़ लेकर आये,
भोले के रंग में रंगी ये दुनिया, महकी ये चारो दिशाएं,
गूंज रहे हैं जय जयकारे, फूल के मस्ती में झूमें सारे,
प्रेम की बर्षा करते शम्भू, भक्तों पर दिन रात जी,
सावन में रहते हैं मस्त मगन, मेरे भोलेनाथ जी-०२
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बहतु सुन्दर हैं भगवान शिव,
भस्म लगाए लम्बी जटाएं, चंदा अपने सर पे सजाये,
ऊँची ऊँची वादियों में रहता, उनका वास जी,
ओ शंकर नाथ जी, हाय शंकर नाथ जी,
शंभू शिव शंकरा।

