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कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी

  • Kanwad Ki Mele Mein Gaura Dhakke Khawegi

एक हाथ का घूँघट तेरी गौरा घा लेगी-०२
कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी,
कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी।

नहीं बिछावेगा कोई सब दूर हटेंगे मेरे से,
ओ सबसे न्यारी दिखेगी, यूँ कहूं खोल के तेरे से,
नहीं बिछावेगा कोई सब दूर हटेंगे मेरे से,
ओ सबसे न्यारी दिखेगी, यूँ कहूं खोल के तेरे से,
मेरे जैसे जन कितनी वहां दुनिया आवेगी-०२
ओ कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी,
कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी।

ओढ़ रहेगी घूँघट की फिर बिलकुल ना घबराना हो,
चाल ढ़ाल से बच लेगी तू गौरा फिर पछताना हो,
ओढ़ रहेगी घूँघट की फिर बिलकुल ना घबराना हो,
चाल ढ़ाल से बच लेगी तू गौरा फिर पछताना हो,
न्याराधीश बना के गौरा गंगा नहावेगी-०२
ओ कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी,
कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी।

और इस भजन को भी देखें: सोने का महल बनबाये दो हमार भोला

डरने की मुझे नहीं जरुरत भोला मेरा साथी है,
भोली भाली जनता ना तू गौरा जोखिम उठाती है,
डरने की मुझे नहीं जरुरत भोला मेरा साथी है,
भोली भाली जनता ना तू गौरा जोखिम उठाती है,
कँवर वीरेंदर की कविता मेरे मन में छावेगी-०२
ओ कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी,
कांवड़ के मेले में गौरा धक्के खावेगी।


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