ना कजरे की धार
ना मुरली की तान ना पायल की झंकार,
ना कोई किया श्रृंगार फिर भी कितने सुन्दर हो,
श्याम कितने सुन्दर हो,
मन में प्रेम भरा और तन में प्रेम भरा, जीवन में प्रेम भरा,
राधा के तुम प्रियवर हो, तुम हीं तो प्रियवर हो।
मोर मुकुट सिर सोहे, कानो कुण्डल प्यारे,
पीताम्बर की छाया, लगते हो सबसे न्यारे,
चले जब वृन्दावन में, महके हर एक बहार,
ना मुरली की तान ना पायल की झंकार,
ना कोई किया श्रृंगार फिर भी कितने सुन्दर हो,
श्याम कितने सुन्दर हो।
तेरी भक्ति में मोहन, हर दुःख दूर हो जाए,
जिसपर कृपा हो तेरी, उसका जीवन मुस्काये,
पत्थर दिल को छूकर प्रेम से दिया संवार,
मन में प्रेम भरा और तन में प्रेम भरा, जीवन में प्रेम भरा,
राधा के तुम प्रियवर हो, तुम हीं तो प्रियवर हो।
और इस भजन का भी अवलोकन करें: कन्हैया आपकी दया से सब काम हो रहा है
तेरी सूरत मनमोहन अँखियों में बस जाए,
तेरी मीठी मुस्कान, हर पीड़ा को मिटाये,
तेरे नाम का जादू छाये बारम्बार,
ना मुरली की तान ना पायल की झंकार,
ना कोई किया श्रृंगार फिर भी कितने सुन्दर हो,
श्याम कितने सुन्दर हो,
मन में प्रेम भरा और तन में प्रेम भरा, जीवन में प्रेम भरा,
राधा के तुम प्रियवर हो, तुम हीं तो प्रियवर हो।
