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कोई न साथी अंत समय का सब हैं स्वार्थ के मीत

  • Koi Na Sathi Ant Samay Ka Sab Hain Swarth Ke Meet

कोई न साथी अंत समय का, सब हैं स्वार्थ मीत-०२
प्रभु की लगन लगा ले मन में, गा ले हरि के गीत-०२
अच्छे करम कमा ले बन्दे, यही आएंगे काम-०२
धर्म के रस्ते चलकर प्राणी, होगी तेरी जीत-०२
प्रभु की लगन लगा ले मन में, गा ले हरि के गीत-०२

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शर्म गहे की लाज बचाते, दीन दयाल कृपाल-०२
भव सागर से पार करेंगे, जनम मरन का जाल-०२
भक्ति भाव का दीप जला ले, यही अमर है रीत-०२
प्रभु की लगन लगा ले मन में, गा ले हरि के गीत,
ओ प्रभु की लगन लगा ले मन में, गा ले हरि के गीत,
साँसों की माला का मन का, जाने कब रुक जाए-०२
हरी सुमिरन कर ले ओ ज्ञानी, फिर पाछे पछताए-०२
श्याम नाम की डोरी थामे, मिट जाए भवभीत-०२
कोई न साथी अंत समय का, सब हैं स्वार्थ मीत,
कोई न साथी अंत समय का, आ आ आ,
सब हैं स्वार्थ मीत।


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