अब मैने सोप दी जीवन डोर तेरे हाथों में मुरलिया वाले
श्रीकृष्ण गोविन्द
हे नाथ नारायण वासुदेवा
अब मैने सोप दी जीवन डोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले।।
अब मैने सोप दी जीवन डोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले।।
अब चाहे पार लगा या डूबा
ओ नाथ द्वारके वाले हैं।।
ओ मेरे नाथ द्वारके वाले
सुन ओ दुनिया के रख वाले
अब मरजी तेरी है मेरी
दुनिया तेरे हवाले।।
अब मैने सोप दी जीवन डोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले।।
अब मैने सोप दी जीवन दोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले।।
है मेरी जीत हाथों में तेरे
अब मेरी हार हाथों में तेरे
मेरी पटवार हाथों में तेरे
और मझदार हंथो में तेरे
तू भावर में डूबा या किनारे लगा।।
मुझको मंजूर है तेरा हर फैसला
कर दो मलिक लागे जो भी तुझको भला।।
अब चाहे बीच धर छोड़ मुझे
चाहे पकड़ के बह बचे।।
अब मैने सोप दी जीवन दोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले
ओ मेरे नाथ द्वारके वाले
सुन ओ दुनिया के रख वाले
अब मरजी तेरी है मेरी
दुनिया तेरे हवाले।।
अब मैने सोप दी जीवन दोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले
तुम्हारे तारे है किस्मत के मारे
लाख पापी भी भव से उबरे
बेसारो के तुम ही सहारा
आया हूं द्वार माई भी तुम्हारे
चाहे अपनालो तुम
चाहे ठुकरादो तुम
हे ऊपर लगी अब तो बाजी मेरी
इसमें राजी तेरी उसमे राजी मेरी
चाहे हंसी करादे मेरी
या होने से हंसी बचले
अब मैने सोप दी जीवन दोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले
ओ मेरे नाथ द्वारके वाले
सुन ओ दुनिया के रख वाले
अब मरजी तेरी है मेरी
दुनिया तेरे हवाले।।
ओ मेरे नाथ द्वारके वाले
सुन ओ दुनिया के रख वाले
अब मरजी तेरी है मेरी
दुनिया तेरे हवाले।।
अब मैने सोप दी जीवन दोर
तेरे हाथों में मुरलिया वाले
अब चाहे पार लगा या डूबा
ओ नाथ द्वारके वाले हैं।।


