बिना मांगे भरा दमन
ओ मेरे श्याम क्या मंगू
है खुशियों से भरा आंगन
कहो घनश्याम क्या मांगू।।
बिना मांगे भरा दमन
ओ मेरे श्याम क्या मंगू
है खुशियों से भरा आंगन
कहो घनश्याम क्या मांगू।।
सफर था सूना जीवन का
घिर हर और अँधेरा था
तुम्हारी आशा जीने की
जो मुझसे दूर सवेरा था
मिले मुझको तेरे दर्शन
की पूरन काम क्या मांगू ।।