सबका दाता है वो सबका मलिक है वो
सबका दाता है वो सबका मलिक है वो
दरबदर आने जाने से क्या फायदा।।
सबका दाता है वो, सबका मालिक है वो
दरबदर आने-जाने से क्या फायदा
सबका दाता है वो, सबका मालिक है वो
दरबदर आने-जाने से क्या फायदा
बेसबब देने वाले ने सब कुछ दिया
फिर सदाएं लगाने से क्या फायदा
सबका दाता है वो, सबका मालिक है वो
दरबदर आने-जाने से क्या फायदा
एक ही आस से अजमत भी है
एक का होकर रहने में इज्जत भी है
एक ही आशियाने पे सर झुक गया
दरबदर सर झुकाने से क्या फायदा
होठ हिलते हैं लेकिन सदा कुछ नहीं
हाथ उठते हैं लेकिन दुआ कुछ नहीं
दिल का जो हाल है उसको मालूम है
फिर मेरे लब हिलाने से क्या फायदा
मैंने माना जहां में तेरा राज है
तेरा दास फकत तेरा मोहताज है
मैं हूं बंदा तेरा, तू है मालिक मेरा
फिर मुझे आजमाने से क्या फायदा
सबका दाता है वो, सबका मालिक है वो
दरबदर आने-जाने से क्या फायदा
बेसबब देने वाले ने सब कुछ दिया
फिर सदाएं लगाने से क्या फायदा
