ऐ श्याम मेरे दिल को वो मर्ज लगा देना

  • Ae Shyam Mere Dil Ko Vo Marj Laga Dena

ऐ श्याम मेरे दिल को वो मर्ज लगा देना
हो दर्द तेरा जिसमे फिर भी ना दावा देना

ऐ मेरे रहबर मुझे फिर खुद से दूर करदे
लगता है मंज़िल करीब आ रही है
मज़ा मंज़िल पर नही है मज़ा तो सफ़र में है
मज़ा तो सफ़र की याद में है।।

एक दिन तो मिलेंगे ही बोलेंगे हँसेंगे ही
इस ख्वाब तमन्ना से हरगिज़ ना जगा देना।।

ऐ श्याम मेरे दिल को वो मर्ज लगा देना
हो दर्द तेरा जिसमे फिर भी ना दावा देना

है यादे जुदाई तू इन्न आँखो के पर्दे पर
हर बिंदु को दिलबर की तस्वीर बना देना
ऐ श्याम मेरे दिल को वो मर्ज लगा देना।।

ऐ श्याम मेरे दिल को वो मर्ज लगा देना
हो दर्द तेरा जिसमे फिर भी ना दावा देना

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