ढूंढने जाता कहा तू मैं तो तेरे प्यार में
ढूंढने जाता कहा तू
मैं तो तेरे प्यार में
अगर शौक है तो देख ले
राज राज हर एक तार में।।
ढूढ़ ने जाता कहा तू
मैं तो तेरे प्यार में
अगर शौक है तो देख ले
राज राज की हर एक तार में।।
बंधो अपने आप को
प्रीतम के प्रेम डोर से
दौड़ा चला आएगा वो
उजड़ी हुए बहार में।।
ढूढ़ने जाता कहा तू
मैं तो तेरे प्यार में
अगर शौक है तो देख ले
रग रग की हर एक तार में।।
प्रेम से बंध यशोदा ने
उखल की डोर से
बन ग्वाला नाच गए
प्रेम की गुज़ार में।।
अगर शौक है तो देख ले
रग रग की हर एक तार में
धुंध्ने जाता कहा तू
मैं तो तेरे प्यार में।।
प्रेम से जब भी बुलाउ
हाजिर हरि को देख लो
द्रोपदी की लाज राखी
धूलो के दरबार में।।

