तेरा दीदार क्यों नहीं होता मुझपे उपकार क्यों नहीं होता
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ।।
मैं गुनेहगार फिर भी तेरा हूं,
मेरा उद्धार क्यों नहीं होता,
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ।।
लाखों पापी तूने तार दिये,
मेरा उद्धार क्यों नहीं होता,
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ।।
तेरे दामन में छुप के रो लेता,
ऐसा इक बार क्यों नहीं हाता,
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ।।
तेरी चौखट पे जो किया मैंने,
सिजदा सविकार क्यों नहीं होता,
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥
तेरी रहमत की चार बूंदों का,
ये दास हकदार क्यों नहीं होता,
तेरा दीदार क्यों नहीं होता,
मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ।।
तेरे पास आने को जी चाहता है,
वृन्दावन आने को दुरी मिटाने को जी चाहता है,
तेरे पास आने को जी चाहता है।।



