पिया मेरे चितचोर
मन मोरा तरसे आज रे, नैनन बरसे नीर,
संत कहें पिया बिन सूना, जग का सारा तीर।
आ आ आ आ आ…
आ आ आ आ आ…
मोहे श्याम बिना चैन ना आवे, सांझ भई या भोर,
नैनन राह निहारे तेरी, पिया मेरे चितचोर,
मोहे श्याम बिना चैन ना आवे, सांझ भई या भोर,
नैनन राह निहारे तेरी, पिया मेरे चितचोर,
जग के मेले देख लिए हैं, देखे सब व्यवहार,
हँसते मुखड़े सूने दिल हैं, झूठा सब संसार,
ढूंढ़ा तुझको बाहर-बाहर, भटकी चारो ओर,
भीतर झाँका, तेरी आहट सुन ली धीरे-धीरे मोर,
मोहे श्याम बिना चैन ना आवे, सांझ भई या भोर,
नैनन राह निहारे तेरी, पिया मेरे चितचोर।
आ आ आ आ आ…
आ आ आ आ आ…
नाम तेरो हर स्वास में बस्यो, फिर भी प्यास ना जाये,
जितना-जितना पास मैं आऊं, उतनी लगन बढ़ाये,
निंदिया रूठी चैन भी रूठो, रूठी जग की डोर
एक तिहारी आस लगी है, पिया मेरे चितचोर।
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आ आ आ आ आ…
ओ ओ ओ ओ ओ…
थक के आई तेरे द्वारे, लेकर अपना हार,
टूट गए सब जग के सहारे, तू हीं पालनहार,
अब ना मांगू धन या दौलत, ना मांगू सम्मान,
एक झलक दे दे सांवरिया, हो जाये कल्याण,
भीतर तू है बाहर तू है, तू हीं सांझ सकाल,
तेरे बिन यह देह विरानी, तेरे बिन सब काल,
बूँद भटके सागर को खोजे, अजब प्रेम की रीत,
संत कहें जब मिलन हुआ तो, मिट गयी जग की प्रीत।

