प्रीत तुझसे लगाई मज़ा आ गया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
मैं गोकुल गयी
मैं मथुरा गयी
वृंदावन में जो आई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
पाट जैसे खुले
तेरे दर्शन हुए
तेरी सूरत निहारी
फिदा हो गयी।।
तेरी बंसी सुनी
मैं दीवानी बनी
मैने अर्जी लगाई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
तूने रस रचाया
जो राधा के संग
और गैया चाराई
ग्वाला बना।।
रंग काला साजे
वस्त्रा पीला साजे
तूने लीला रचाई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
परिक्रमा जो मैने
करी सावरे
तेरी बंकी आदाओ
के किससे सुने।।
मेरे श्याम सुंदर
तेरे देखे मंदिर
राधा कुंड में नहाई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।
तेरे नैना कमाल
घुंघराली लता
चाल टेडी चले
देखे तिरछी नज़र।।
राधे राधे जापू
हे जय श्री राधे
राधे राधे जापू
राधे श्याम जापू
तेरी माला फिराई
मज़ा आ गया।।
मेरे बनके पिया
दिल तुझको दिया
प्रीत तुझसे लगाई
मज़ा आ गया।।


