तेरे सिवा मोहन कोई नहीं मेरा

  • Tere Siva Mohan Koi Nahin Mera

जब खींचे दुशासन चीर, आँखों से बहते नीर,
तेरे सिवा मोहन, नहीं कोई बचाने आया है,
द्रौपदी ने जब देखा, नहीं कोई यहाँ अपना,
उसने तब मोहन, तुमको बुलाया है,
आ जाओ कुञ्ज बिहारी-०३

सभा के बीच खड़ी, लाज थी दाव पे सारी,
सबने नजरें फेरी, तभी तो आये गिरधारी,
हाथ उठाये श्याम को, विश्वास जगाया है,
लाज बचायी तुमने, केशव ने चिर बढ़ाया है,
जब खींचे दुशासन चीर, आँखों से बहते नीर,
तेरे सिवा मोहन, नहीं कोई बचाने आया है,
द्रौपदी ने जब देखा, नहीं कोई यहाँ अपना,
उसने तब मोहन, तुमको बुलाया है,
आ जाओ कुञ्ज बिहारी-०३

प्रह्लाद को बचाया, अग्नि में भी थाम लिया,
नरसिंह बनकर आये, भक्त का मान लिया,
ध्रुव को भी वन में, तुमने दर्शन दिया,
छोटे से बालक का, अटल भरोसा निभाया है,
जब खींचे दुशासन चिर, आँखों से बहते नीर,
तेरे सिवा मोहन, नहीं कोई बचाने आया है,
द्रौपदी ने जब देखा, नहीं कोई यहाँ अपना,
उसने तब मोहन, तुमको बुलाया है,
आ जाओ कुञ्ज बिहारी-०३

और इस भजन का भी अवलोकन करें: श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी

गजेंद्र ने पुकारा, जब संकट में जान पड़ी,
चक्र उठाकर आये, उसकी नैया पार करी,
सुदामा के घर आये, दीनता को अपनाया,
मुट्ठी भर चावल में, प्रेम अनमोल पाया है,
जब खींचे दुशासन चिर, आँखों से बहते नीर,
तेरे सिवा मोहन, नहीं कोई बचाने आया है,
द्रौपदी ने जब देखा, नहीं कोई यहाँ अपना,
उसने तब मोहन, तुमको बुलाया है,
आ जाओ कुञ्ज बिहारी-०३


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