कैसे मिलनो होये मेरे उद्धव
कैसे मिलनो होये मेरे उद्धव
उन्न माधव मदन मुरारी से
कैसे मिलना होये मेरे उद्धव से
उन्न माधव मदन मुरारी से
यो कहे कहे राधिका उद्धव
तेरी भावर करियो जाए माधव से
दिन नाही चाइना
रात नही नीडिया
लो लगी है बाँवरी से
उन माधव मदन मुरारी से
बलपन में हरी संग खेली
अब करी गये कान्हा ह्यूम अकेली
सुनी सेज हमे दर लागे
विरह की बीमारी से
उन्न माधव मदन मुरारी से
कही रही है गोपी उद्धव से
तुम जाए के कहीयो मेरे माधव से
लता कहे समझाए के
मेरी लगान लगी है गिरधारी से
उन्न माधव मदन मुरारी से

