श्याम भजले घड़ी दो घड़ी
उल्झानो की ये सुलझे लड़ी
श्याम भजले घड़ी दो घड़ी।।
उल्झानो की ये सुलझे लड़ी
श्याम भजले घड़ी दो घड़ी।।
श्याम सुमनिरण का धन साथ देगा
जग की माया क्या कब रूठ जाए।।
एक पल का बरसा नहीं है
सास का तार कब टूट जाए
जिंदगी मौत के डर खड़ी है
भजले श्याम घड़ी दो घड़ी
उल्झानो की ये सुलझे ये लड़ी
भजले श्याम घड़ी दो घड़ी
साफ दिखेगी सूरत प्रभु की
मन के दर्पण का तुम मेल ढोलो
सबके दिल गंगा जल से लगेंगे
अपने मन की कपट गाथ खोलो।।



