मुर्छित हो गए लक्ष्मण जी तो राम के बरसे नैन
मुर्छित हो गए लक्ष्मण जी
तो राम के बरसे नैन
तो मानो सरयू में बाद आ गई।।
अंगद सुग्रीव जामवंत सुनो
भाई को बचने की राह चुनो।।
नहीं बचा जो लखन तो ताज दूंगा प्राण
अंगद सुरग्रीव जामवंत सुनो।।
सुबह से कैसे शाम बीती
कैसे बीती बरसात
तो मानो सरयू में बाद आ गई।।
चलती रहेंगी सांस तेरी
इसमें जिंदगी है मेरी।।
कुछ माह में दूंगा मैं लखन को
चलती रहेगी सांस तेरी
राम के मन के अरमानों ने
कर डाला बैचेन
मानो सरयू में बाद आ गई।।
जामवंत ने देखा तो उड़ गए हनुमान
सूर्य उदय से पहले आना बोले द श्रीराम
समय से बूटी ले आए हनुमान।।
संजीव बूटी ले आए
सूरज से पहले पाहुचे हनुमान।।
गले लगाके हनुमत को
भगवान को आया चैन
मानो सरयू में बाद आ गई।।
राम विरह के गीत अमित भी गाता
राम विरह के गीत गगन
भी गाता भर के नैन
मानो सरयू में बाद आ गई।।
