मुझे आदत पड़ गई हनुमान
अभिलाषा है बस मुझको तेरे दर्शन पाने की,
हां दर्शन पाने की,
ओ मुझे आदत पड़ गई हनुमान तेरे मंदिर आने की,
तेरे मंदिर आने की,
जय जय जय हनुमान-०४
ओ सुबह उठता हूँ जब मैं तुझे याद करता हूँ,
ओ देख तेरी तस्वीर को हनुमत खुश मैं रहता हूँ,
ओ सुबह उठता हूँ जब मैं तुझे याद करता हूँ,
ओ देख तेरी तस्वीर को हनुमत खुश मैं रहता हूँ,
मेरा मन करता है हरदम तुझको भजन सुनाने की,
हां भजन सुनाने की,
ओ मुझे आदत पड़ गई हनुमान तेरे मंदिर आने की,
तेरे मंदिर आने की,
ओ अभिलाषा है बस मुझको।
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ओ तेरी नज़रों में ये दुनिया सारी झुकती है,
ओ आ जाए कोई प्रेम भाव से मिले ये मुक्ति है,
ओ तेरी नज़रों में ये दुनिया सारी झुकती है,
ओ आ जाए कोई प्रेम भाव से मिले ये मुक्ति है,
ओ इच्छा है बस मेरी तुझको घर पे लाने की,
हां घर पे लाने की,
ओ मुझे आदत पड़ गई हनुमान तेरे मंदिर आने की,
तेरे मंदिर आने की,
ओ अभिलाषा है बस मुझको।
ओ हर दम मेरे पास में रहता देव तू हीं दिखाई,
ओ रोम रोम में आप बसे हो पढूं मैं राम चौपाई,
ओ हर दम मेरे पास में रहता देव तू हीं दिखाई,
ओ रोम रोम में आप बसे हो पढूं मैं राम चौपाई,
अब मुझको ना डरकर ओ हनुमत बुरे ज़माने की,
आ बुरे ज़माने की,
ओ मुझे आदत पड़ गई हनुमान तेरे मंदिर आने की,
तेरे मंदिर आने की,
ओ अभिलाषा है बस मुझको।
ओ मदन गाजीपुरी ये जपता हरदम तेरी माला,
ओ शंकर के अवतार ओ बाबा बन गया तू रखवाला,
ओ मदन गाजीपुरी ये जपता हरदम तेरी माला,
ओ शंकर के अवतार ओ बाबा बन गया तू रखवाला,
हो तुम करदो कृपा सुनील पे चरणों में बिठाने की,
ओ चरणों में बिठाने की,
ओ मुझे आदत पड़ गई हनुमान तेरे मंदिर आने की,
तेरे मंदिर आने की,
ओ अभिलाषा है बस मुझको,
अभिलाषा है बस मुझको।
