बोल पिंजारे का तोता राम रे हरे राम राधे श्याम सिया राम रे
बोल पिंजारे का तोता राम रे
हरे राम राधे श्याम सिया राम रे।।
प्रभु की भक्ति सुबाह के जैसे
माया है एक ढलती शाम।।
दुविधा में ना कोयू जाए
तुम्हें ना माया मिले ना राम।।
तू चुनले भक्ति अभि राम रे
हरे राम राधे श्याम सिया राम रे।।
बोल पिंजारे का तोता राम रे
हरे राम राधे श्याम सिया राम रे।।
चंचल मन को केन्द्रित करदे
श्री हरि जी के चरनो में
हरि हरि हरि श्री हरि हरि
भोग विलास में समय गावा मति।।
कुछ भी नहीं सपनो में
छोड आलम सकल विश्राम रे
हरे राम राधे श्याम सिया राम रे।।
बोल पिंजारे का तोता राम रे
हरे राम राधे श्याम सिया राम रे।।


