जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन
जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।।
मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन।
जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन।।
कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन।
जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन ।।
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर।।
प्रनवउँ पवन कुमार खेल बन पावक ज्ञान घन
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ।।
जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
