रघुकुल रीत कहाँ से लाऊँ
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं ,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं।
सत्य वचन अब भारी लगते, झूठ सभी को भाते हैं,
मर्यादा की राह छोड़कर, स्वार्थ पथ अपनाते हैं,
राम राज्य की बातें करते, मन में कपट छुपाये हैं,
मुख पर मीठे बोल सजाये, भीतर शूल उगाये हैं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं ,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं।
मात पिता का मान ना जाने, गुरुवार का सम्मान कहाँ,
धन के आगे झुकते, देखो बिकता अब ईमान यहाँ,
भाई भाई से रूठा बैठा, प्रेम कहीं खो जाता है,
रिश्तों में जब प्रेम ना हो, तो जीवन सुना लगता है,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं।
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धर्म ग्रन्थ सब पढ़ते हैं, पर धर्म ह्रदय में आता नहीं,
मंदिर जाकर शीश झुकाये, अंतर मन झुक पाता नहीं,
सीता जैसी पावन नारी, हर युग में सताई है,
लक्ष्मण जैसा सेवा भावी, दुनिया में दुर्लभ भाई है,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं।
भरत सामान त्यागी मन को, कौन ह्रदय अपनाएगा,
हनुमत जैसी भक्ति लेकर, कौन राम तक जाएगा,
कलयुग की इस अंधी दौड़ में, मानव खुद को हार गया,
अपने हीं अभिमान अग्नि में, सच्चा जीवन मार गया,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
हे रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
सत्य वचन अब भारी लगते, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
रघुकुल रीत कहाँ से लाऊं, दुर्जन को कैसे समझाऊं,
लोभ मोह में घिरे हुए सब, कैसे धर्म ध्वजा लहराऊं,
सत्य वचन अब भारी लगते, दुर्जन को कैसे समझाऊं।
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