मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
राम और भरत में छिड़ गयी
भैरव एक लगाई
चौदह बरस लड़ेंगे दोनो
चलो देखने भाई
और एक राम है और एक भरत शील
अवध राज को गेंद बना
दोनो ने ठोकर मारी
दोनो ने ठोकर मारी
मेरे खुलुस की गहराई से नही मिलते
ये झुटे लोग है जो सच्चाई से नही मिलते
मोहब्बत का सबक दे रहे है दुनिया को
पेर अपने घर में सगे भाई से नही मिलते
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
सुनहू भरत हम झुत ना कहीही
उदासीन तापस बन रहीही
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
पवन हेतु पतित पवन को
हो सावन जैसी बरस रही अँखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
बहाने लगे है बिंदु अँसुअन के
हो भाव के रस में सरस भाई अँखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
बोलो सच्चिदानंद भगवान की जय
जय श्री राम
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
मिल जाओ राम तरस रही अखियाँ
