भवन में आये है श्री राम
मिटटी से चौका लीपो तुम
वंदन वार सजाऊँ
भाति भाति के व्यंजन रखकर
प्रभु को भोग लगाओ
मुग्धा मगन हो नित्य करो
छोड़ कर सारे काम
भवन में आये है श्री राम
अवध में आये है श्री राम
भवन में आये है श्री राम ॥
अंखिया जो बरसो से प्यासी
उसकी प्यास बुझाओ
केवट ने जैसे पग धोये
नैनं जल बरसाओ
भाव सागर को पार करो तुम
लेकर कर तुम उनका नाम
भवन में आये है श्री राम
अवध में आये है श्री राम
भवन में आये है श्री राम ॥
