गौरां तेरा लल्ला बिगड़ गयो रे
गौरां तेरा लल्ला बिगड़ गयो रे
गौरां, तेरा लल्ला, बिगड़ गयो रे ॥
मूषक के, संग में, शैतानी करे रे ॥
आसन पे, मलमल का, कपड़ा विछाया ॥
मलमल का, कपड़ा, कुतर गया रे ॥
मूषक के, संग में, शैतानी करे रे ॥
गौरां, तेरा लल्ला, बिगड़ गयो रे…
चन्दन की, चौकी पे, कलछ भराया ॥
कलछ, का जल, लुढ़काए गयो रे ॥
मूषक के, संग में, शैतानी करे रे ॥
गौरां, तेरा लल्ला, बिगड़ गयो रे…
भोग के, लिए मैंने, मोदक बनाए ॥
मूषक, वो मोदक, जूठे कर गयो रे ॥
मूषक के, संग में, शैतानी करे रे ॥
गौरां, तेरा लल्ला, बिगड़ गयो रे…
सोने की, थाली में, आरती सजाई ॥
जाने वो, कहाँ जा के, छिप गयो रे ॥
