चलना संभलना ना गिर जाना अबकी बेर जग जाल में
चलना संभलना ना गिर जाना
अबकी बेर जग जाल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
चलना संभलना ना गिर जाना
अबकी बेर जग जाल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
जीवन की अंजनी रहो में
सुख दुख की घिरती घटाओं में।।
प्रीतम को अपने रिजाय
गाते रहे बढ़ते जाए।।
अवलंब अपना है बस नाम
रामजी का इस काल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
आनंद रूप सिया रघुवर के
चरणों में मठ ये धर करके।।
अपनी कहानी सुनाना
उनसे ना कुछ भी छुपाना।।
वोही मिटाये बुरे अंक जोभी लिखे भाल में
वोही मिटाये बुरे अंक जोभी लिखे भाल में।।
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
अचरज क्या दुनिया जो उलझादे
अचरज क्या राम उसी सुलझादे
अचरज है राम नाम गए
और अपना परम धाम पाए।।
राम नाम लेवा को सुख
यो मिले ज्यो सजे थाल में।।
चलना संभलना ना गिर जाना
अबकी बेर जग जाल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
चलना संभलना ना गिर जाना
अबकी बेर जग जाल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
जीवन की अंजनी रहो में
सुख दुख की घिरती घटाओं में।।
प्रीतम को अपने रिजाय
गाते रहे बढ़ते जाए।।
अवलंब अपना है बस नाम
रामजी का इस काल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
आनंद रूप सिया रघुवर के
चरणों में मठ ये धर करके।।
अपनी कहानी सुनाना
उनसे ना कुछ भी छुपाना।।
वोही मिटाये बुरे अंक जोभी लिखे भाल में
वोही मिटाये बुरे अंक जोभी लिखे भाल में।।
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
अचरज क्या दुनिया जो उलझादे
अचरज क्या राम उसी सुलझादे
अचरज है राम नाम गए
और अपना परम धाम पाए।।
राम नाम लेवा को सुख
यो मिले ज्यो सजे थाल में।।
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
चलना संभलना ना गिर जाना
अबकी बेर जग जाल में
अवसर ना जाए ये मन ऐसा गया
सदा हर हाल में।।
राम सिया राम राम सिया राम
राम सिया राम राम सिया राम।।
