छोड़ कर भजन न रंग ये तन
छोड़ कर भजन न रंग ये तन
रंग तूने रंग प्रभु प्रीति मन
झूठा सपन ये दुनिया ये धन
प्रभु है सुखदायी करले तू भजन
सिया राम जय जय राम सिया
सिया राम सिया राम रे ॥
छोड़ कर भजन ना रंग यह तन
रंगे तूने रंग प्रभु प्रीति में मन
झूठा सपान ये दुनिया ये धन
प्रभु है सुखदायी करले तू भजन
सिया राम जाई जय राम सिया
सिया राम सिया राम रे ॥
छोड़ कर भजन ना रंग लिए तंन
रंगे तूने रंग प्रभु प्रीति में मन ॥
झूठा सपना ये दुनिया ये धन
प्रभु है सुखदायी करले तू भजन
सिया राम जय जय राम सिया
सिया राम सिया राम रे ॥
मन को राम में लगा
प्यास नाम की जगा
प्यास जातक की आवाज़ कानो से लगा
उनकी करुणा का जल तो बरसता सदा
जिसपे रीझे वो ऐसी लगा तू लगान
सिया राम राम राम राम रे
जय जय राम सिया सिया राम सिया राम रे
सिया राम रे सिया राम रे ॥
वो कृपा रूप है
अनुरूप मन के है
उनका बनके तो देख
हारते कष्ट जन के है
राम जी को वो पाए
जिसके भक्ति मन में है
ऐसी भक्ति की मस्ती में ला तो मन
सिया राम राम राम राम रे
जय जय राम सिया सिया राम सिया राम रे
सिया राम रे सिया राम रे ॥
जो सदा सब में है
और सदा सबके है
उनको देखे वो जो
रखे आँखे मन की ॥
जिनमे प्रीति सरल हो वो पाते उनको है
ऐसी प्रीति की रीति में ला दो ये मन
सिया राम राम राम रे
जय जय राम सिया सिया राम सिया राम रे
सिया राम रे सिया राम रे ॥
छोड़ कर भजन ना रंग यह तंन
रंगी तूने रंग प्रभु प्रीति में मन ॥
झूठा सपना ये दुनिया ये धन
प्रभु है सुखदायी करले तू भजन
सिया राम जय जय राम सिया सिया राम
सिया राम सिया राम रे॥
