अरे कुछ सोच जरा सा हैं तू किनसे आस लगाये

  • Are Kuchh Soch Jara Sa Hai Tu Kinse Aas Lagaye

अरे कुछ सोच जरा सा
हैं तू किनसे आस लगाये
राखे अनमोल खजाना
और जग में हाथ फेलाए
कहे ना गए ना हरि नाम
सिया राम भजो भाई
हरि नाम सिया राम।।

अरे कुछ सोच ज़रा सा
तू किनसे आस लगाए
रखे अनमोल खजाना
और जग में हाथ फैलाए
कहे ना गये ना हरी नाम
सिया राम भाजो भाई
हरी नाम सिया राम ॥

अरे कुछ सोच ज़रा सा
तू किनसे आस लगाए
रखे अनमोल खजाना
और जाग में हाथ फैलाए
कहे ना गये ना हरी नाम
सिया राम सिया राम ॥

जिसने किया दुनिया का भरोसा
दॉखा यहा वोही खाए
सगे साजन जितना दुख देते
बैरी नही दे पाए ॥

अरे अब संभाल ज़रा सा
तू किनको मीट बनाए
साथ छ्चोड़ेंगे तेरे
काम बस राम ही आए
कहएे ना गये सिया राम
सिया राम सिया राम भाजो भाई
हरी नाम सिया राम भाजो भाई
हरी नाम सिया राम रे ॥

अरे तू कुच्छ सोच ज़रा सा
तू किनसे आस लगाए

दिया ये नर्तन जिसने उसको
भूले से भी भूल ना जाना
जाग पाकर भी क्या पाया
सभी यही रह जाना ॥

अरे अब जाग ज़रा सा
तुझे माया उलझाए
बचे इससे वो ही जो
राम चरनो में आए
कहे ना गये रे
सिया राम सिया राम भाजो भाई
हरी नाम सिया राम भाजो भाई
हरी नाम सिया राम रे ॥

अरे कुच्छ सोच ज़रा सा
तू किनसे आस लगाए ॥

सच तो यही
और सब यहा झूठा
भेद ये जो जान जाए
जीवन का सुख उसने लूटा
वो ही प्रभु को पाई

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