ओ रे मनवा भव सागर की लहरे बोले रे

  • O Re Manwa Bhav Sagar Ki Lehare Bole Re

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

भाज राम राम जीवन नैया
डोले रे डोले रे

भाजले राम दुखो के भावर से
पल से तू तार जाएगा
जीवन देने वाला ही खुद
आकर तुझे बचाएगा

वही राम तो जीवन में
अमराट रस घोले रे घोले रे

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

जीव तो जाग में उसकी ही
मर्ज़ी से आता और जाता है

जितनी जिसको स्वॉश मिले
उतने ही दिन रह पता है
ये ज्ञान गठरिया राम बिन
कौन खोले रे खोले

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

भार पाप का ढोते ढोते
तक सा गया है तू पगले
नीड में चलता फिरता था
अब भी कुच्छ वक़्त है तू

मैला सा हो गया है
खुद को तू ढोले रे ढोले

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

भाज राम राम जीवन नैया
डोले रे डोले रे

ओ रे मनवा भाव सागर की
लहरे बोले रे बोले

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