किसी दिन बनूँगी मैं
किसी दिन बनूँगी मैं मोहन की रानी,
किसी दिन बनूँगी मैं मोहन की रानी,
लिखूंगी अधर से विरह की कहानी,
ह्रदय के सिंहासन पे उनको बिठाके,
मैं चरणों में उनके मिटादूँ तरुणाई,
किसी दिन बनूँगी मैं मोहन की रानी।
सजाऊंगी पलकों में उनकी हीं मूरत,
निहारूंगी हर पल वो सांवली सूरत,
ना मन में कोई और अभिलाषा होगी,
बस उनसे हीं मेरी ये दुनिया सजी होगी,
वो बंसी बजाएं, मैं सुध बुध भुला दूँ,
दिखाऊं ना मैं उनको नैनों का पानी,
किसी दिन बनूँगी मैं मोहन की रानी,
लिखूंगी अधर से विरह की कहानी।
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जहाँ गूंजती है कन्हैया की मुरली,
वहीं मेरी दुनिया वहीं मेरी नगरी,
भले जग ये सारा मुझे कुछ भी बोले,
मेरे रोम रोम में तो घनश्याम बोले,
यही आस लेकर जनम मैं बिता दूँ,
बने मेरे भक्ति की दुनिया दीवानी,
किसी दिन बनूँगी मैं मोहन की रानी-०२
लिखूंगी अधर से विरह की कहानी,
ह्रदय के सिंहासन पे उनको बिठाके,
मैं चरणों में उनके मिटादूँ तरुणाई।

