कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा।
कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो,
होठों पे मेरे बस तेरा हीं जप हो,
कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो।
वृन्दावन की गलियों सा मेरा मन हो,
सांसो में बसा तेरा हीं सुमिरन हो,
जीवन की हर राह पे, तेरा ही दख हो,
कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो,
होठों पे मेरे बस तेरा हीं जप हो।
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माखन की मटकी वो पनघट की डगर,
ढूंढे कन्हैया तुझे मेरी नजर,
भव के भंवर से मुझे पार लगा,
सोइ हुई मेरी तू किस्मत जगा,
जीवन की नैया का तुहीं मांझी हो,
कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो,
होठों पे मेरे बस तेरा हीं जप हो।
मोर मुकुट और पीताम्बर धारी,
चरणों में तेरे हें दुनिया ये सारी,
मीरा सा प्रेम और राधा सी भक्ति,
तेरे हीं हाथों में है मेरी मुक्ति,
हर एक जनम में तेरा हीं दर हो,
कान्हा तेरे नाम से मेरी सुबह हो,
होठों पे मेरे बस तेरा हीं जप हो,
वृन्दावन की गलियों सा मेरा मन हो,
सांसो में बसा तेरा हीं सुमिरन हो।
राधे राधे श्याम में राधे,
राधे राधे श्याम में राधे।

