कहना हीं क्या
कहना हीं क्या,
कहना हीं क्या, ये नैन कृष्ण से जो मिले,
सोये थे जो भाग्य, वो कान्हा संग खिले,
नटखट की चितवन ने, जादू ऐसा डाल दिया,
राधा के इस मन को, मोहन ने संभाल लिया,
कहना हीं क्या, ये नैन कृष्ण से जो मिले।
मैं चन्दन की लकड़ी, तुम शीतल धार हो,
मेरी नैया के माधव, तुम हीं पतवार हो,
जार रूठे तो रूठे, मुझे गम नहीं कोई,
तेरे प्रेम की गंगा में, मैं पावन सी हुई,
भक्तों को जैसे, भगवान मिल गए,
कहना हीं क्या, ये नैन कृष्ण से जो मिले।
यमुना के किनारे, वो तेरा मुस्काना सांवरे,
चोरी-चोरी माखन का, वो खाना सांवरे,
कण-कण में तू हीं तू, मेरा रोम रोम गाये,
बिना तेरे कान्हा, अब चैन कहीं ना आये,
युग युग के प्यासों को, जैसे प्राण मिल गए,
कहना हीं क्या, ये नैन कृष्ण से जो मिले।
और इस भजन को भी देखें : राधे मैं मरूं बृज में कुछ ऐसी कृपा हो जाए
राधा नाम अधूरा, जो श्याम संग ना आये,
प्रेम की ये ज्योति, अब बुझने ना पाए,
तुम प्रीतम मेरे, मैं दासी हूँ तेरी,
सुन लो ओ छलिया, अब अर्ज ये मेरी,
भक्ति की डोरी से, दो दिल ये मिले,
कहना हीं क्या, ये नैन कृष्ण से जो मिले-०२
सोये थे जो भाग्य, वो कान्हा संग खिले,
कहना हीं क्या-०२

