अंजनी सूत अम्बर पर देखे गोल गोल कुछ लाल लाल
माँ अंजनी को था श्राप
भानु उगते ही निकले
तंन से प्राण
मा की ममता वास क्रोधित हो
सूरज निगल गये हनुमान
सूरज निगल गये हनुमान।।
अंजनी सूत अम्बर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
अंजनी सूट अंबार पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
चंचल बचपन उछाले कूड़े।।
माँ अंजनी को था श्राप
भानु उगाते हाय निकले
तन से प्राण
माँ की ममता वास क्रोधित हो
सूरज निगल गए हनुमान
सूरज निगल गए हनुमान
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
चंचल बचपन उचले कुदे
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
चंचल बचपन उचले कुदे
जब जब देखे लाल लाल लाल
जीवन के दिन बीट गए
अंजनी आए अंतिम पल में
भारी मन से सोच रही थी वो
कितना दर्द भर कल में
प्राण छोड जाएगा पिंजरा
जब रवि निकले लाल लाल लाल
प्राण छोड जाएगा पिंजरा
जब रवि निकले लाल लाल लाल
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
माँ ने कहा पुत्र अब मेरा
रवि उगाते ही मारन का पली
सुनके क्रोधित हुए पवन पुत्र
बोला सूरज जौ निगाल
माई तो कब से सोच रहा था
माई तो कब से सोच रहा था
खाउ ये गोला लाल लाल लाल
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
बाल कपिश उदा गोदी से
बाल कपिश उदा गोदी से
रथ समेट रवि निगल गया
मां के प्राण नहीं जाए अब
समय काल का निकला गया
रवि को नहीं उगलंगा माई तो
रवि को नहीं उगलंगा माई तो
कैसे निकले मां तेरे प्राण
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
अंजनी सुत अंबर पर देखे
गोल गोल कुछ लाल लाल लाल
चंचल बचपन उचले कुदे
जब जब देखे लाल लाल लाल
