पर्वत उठाओ ना
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
लीला करो ना मोहन, माखन चुराओ ना,
तेरा गांव सुना है, अब तो लौट आओ ना,
तेरी बंसी सुनने को, अब गैया तरस रही,
और गोपियाँ भी कह रहीं, वापस रिझाओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
तेरी राह देख कुञ्ज की गालियां तरस रहीं,
आ जाओ श्याम घर को, अब लौट आओ ना।
और इस भजन का भी अवलोकन करें: बोल सांवरिया बोल तुझको कैसे रिझाया जाए
जैसे बृज पे संकट घनघोर छाया था,
मेघों ने शोर घन घन, गर्जन मचाया था,
जैसे बृज पे संकट घनघोर छाया था,
मेघों ने शोर घन घन, गर्जन मचाया था,
नन्दलाल ने देवेंद्र का, अहम मिटाया था,
जो कनिष्ठिका पे कृष्ण ने गिरिवर उठाया था,
मुझपर भी श्याम, संकट के मेघ छा रहें,
तेरे आस में मैं भींगता, जगदीश आओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
तेरी राह देख कुञ्ज की गालियां तरस रहीं,
आ जाओ श्याम घर को, अब लौट आओ ना।
यमुना में काल नाग ने गरल मिलाया था,
बृज धाम सारा प्यासा, जल अकाल छाया था,
यमुना में काल नाग ने गरल मिलाया था,
बृज धाम सारा प्यासा, जल अकाल छाया था,
जल को बनाने निर्मल, गोपाल आया था,
और कालिया के फ़न पर, नर्तन दिखाया था,
मेरी भी जिंदगी में श्याम, विष है घुल गया,
मेरे भी दुःख के सर पर,, नर्तन दिखाओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
तेरी राह देख कुञ्ज की गालियां तरस रहीं,
आ जाओ श्याम घर को, अब लौट आओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
हे श्याम मुरली वाले।
हो ओ ओ ओ…
ओ ओ ओ ओ…
मत्स्य बने माधव, जल प्रलय से निकाला ,
अमृत के लिए कूर्म बनके, मंथन कर डाला,
वराह ने मारा हिरण्याक्ष , पृथ्वी को संभाला,
नरसिंह बनके हिरण्यकश्यपु को चीर दाल,
तुम वामन हो माधव, त्रिलोकी को नापो,
तुम योद्धा हो परशुराम शत्रु को मिटा दो,
तुम रघुवर हो राम हो, रावण को मारो,
श्री कृष्ण बन के दुराचारी कंश को संवारो,
तुम कल्कि बनके आओ, काल को सांवरो,
एक चक्र फेक सुदर्शन कष्ट से उबारो,
इस युग में सब असुर है, चौतरफा विध्वंस है,
अपनों का मांस नोचते, अब घर घर में कंश है,
कब आओगे गिरधारी, मुरारी ओ बनवारी,
इतनी सदियां बीत गई, आस में तुम्हारी,
जिस गैया को कन्हैया, माता कहा था तुमने,
उस माता को हीं घर में काटा, कलयुग में आज जन ने,
लीला करो ना मोहन, माखन चुराओ ना,
तेरा गांव सुना है, अब तो लौट आओ ना,
तेरी बंसी सुनने को, अब गैया तरस रही,
और गोपियाँ भी कह रहीं, वापस रिझाओ ना,
हे श्याम मुरली वाले, मुरली बजाओ ना,
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना,
तेरी राह देख कुञ्ज की गालियां तरस रहीं,
आ जाओ श्याम घर को, अब लौट आओ ना-०२



