जय जय बालाजी गाने लगी
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
नाच नाच के सुनने लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
नाच नाच के सुनने लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
पहली सखी नयू कहे बहना
रात मानने देखा सपना
मेहंदी पूर में खड़ा हनुमान
संग में भी है माँ अंजना
सखी हाल बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
दूजी सखी कहे बीबी
बन तन के बड़ा लक्ष्मण
बजरंग बान लिए देखे
भोर भाई आँख खुली
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
टीजी सखी बोले दैया दैया रे
सपने में देखी दुरगे मैया
शेर सवारी पे माता चली
मेरे हनुमना चले पया
कर में द्वाजा लहराने लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चौथी सखी बोली फागुन में
होली कहले मेहनदीपुर में
प्रेत राज संग भैरव थे
भगत रंगे अपने रंग में
राज महल की बात रही
जय जय बालाजी गाने लगी।।
चार सखी बतलान लगी
जय जय बालाजी गाने लगी।।

