राधे मैं मरूं बृज में कुछ ऐसी कृपा हो जाए

  • Radhe Main Marun Brij Mein Kuch Aisi Kripa Ho Jaye

वृन्दावन के वृछ को मर्म ना जाने कोय,
डाल डाल और पात पात पर, श्री राधे-राधे होय।

श्री राधा वृषभानु मेरी जीवन प्राण,
अंत समय बृजवास हो, बस इतना दो अरमान,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए-०२
तेरी रज माथे पे हो और प्राण निकल जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

बृज की पावन धूलि में, मेरा ये तन मिल जाए,
तेरे चरणों की दासी, ये आत्मा कहलाये,
मुझे और ना कुछ भी सूझे, बस तू हीं तू दिख जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

कालिंदी के घाट पर, जब आये अंतिम शाम,
होठों पे मेरी लाड़ो, बस तेरा हीं हो नाम,
यमुना की लहरों में, मेरा जीवन बह जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

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गोवर्धन की तलहटी और संतों का हो संग,
मेरी रूह पे चढ़ जाए, तेरी भक्ति वाला रंग,
परिकर्मा करते करते ये शरीर शांत हो जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

गहवर वन की कुञ्ज में, मेरा छूटे जा ये प्राण,
मुझे लेने को आये, खुद मेरे श्री भगवान,
तेरी मोर कुटी के साये, मुझे अपने में छुपाये,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

राधा कुञ्ज गली सा, पावन हो मेरा अंत,
मुझे दर्शन दे जाए, बृज मंडल के सब संत,
मेरे पाप जन्म जन्म के, उसी पल में धूल जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

बृज के सरोवर नाल पे मेरा पंक्षी वन हो वात्सल्य,
मैं जन्म जन्म तक रखूं, बस तेरे दर की आस,
चाहे बनूँ कदम्ब की डाली, जो तेरे काम आ जाए
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

स्वांस स्वांस में नाम हो श्याम हो राधे,
कोई और ना अरमान रहे, कोई और न अपवाद,
मेरी अंतिम हिचकी आये और तेरा दरश मिल जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए,
तेरी रज माथे पे हो और प्राण निकल जाए,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।

श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा,
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा,
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
राधा , श्री राधा,
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री राधा,
वृन्दावन के वृछ को मर्म ना जाने कोय,
डाल डाल और पात पात पर, श्री राधे-राधे होय,
श्री राधा वृषभानु मेरी जीवन प्राण,
अंत समय बृजवास हो, बस इतना दो अरमान,
राधे मैं मरूं बृज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए।


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