विनती सुनो हनुमान मेरी तो सागर में पड़ी नैया

  • Vinti Suno Hanuman Meri To Sagar Mein Padi Naiya

विनती सुनो हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

बीच भंवर में नैया डोले
चलते जावे जो होले होले।।

झुठा जगत जहां
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

विनती सुनो हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

नैय्या बोले जय हनुमना
किनारे का नहीं ठिकाना।।

सुनलो कृपा निधान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

विनती सुनो हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

सिया राम के भगत कहा
लक्ष्मण के तूने प्राण बचाये।।

राह दिखा हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

विनती सुनो हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

सुनलो बाबा घाटे वाले
आकार मेरी नाव बचाले।।

हुं मैं बड़ा नादान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

विनती सुनो हनुमान
मेरी तो सागर में पड़ी नैया।।

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