बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं दरबार में तेरे आई हूं

  • Bala Naam Tumhara Sunke Main Darbar Mein Tere Aayi Hu

बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं
दरबार में तेरे आई हूं।।

आंसू से तुम्हें पहनने को
मैं हार पिरो के लिए हूं।।

दुख दर्द ने मुझको सत्य है
और मोह माया ने फैसला है।।

गैरो की नहीं मैं बालाजी
अपनो की ही बहुत सताई हूं।।

बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं
दरबार में तेरे आई हूं।।

जिस जिस पे मैंने विश्वास किया
उसके बदले में आगत दिया।।

हुआ पास हरदेय बार मेरा
अपने ही लहू में नहायी हूं।।

देखे कई धाम कई मंदिर
नहीं आस जग मेरे अंदर
कही चैन नहीं मिलता मुझे
इस बात की देती दुहाई हूं।।

बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं
दरबार में तेरे आई हूं।।

दरबार में तेरे कहते हैं
सब दुखियों के दुखड़े काटते हैं।।

दुख दर्द अपना मिटने को
मन आस जगा के आई हूं।।

बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं
दरबार में तेरे आई हूं।।

अंतिम आशा है धाम तेरा
अंतिम आशा है नाम तेरा
तेरे चारनो की धूल से माथे में
मैं तिलक लगाने को आई हूं।।

बाला नाम तुम्हारा सुनके मैं
दरबार में तेरे आई हूं।।

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