सर पे हाथ है माँ का
भूल जा मनवा सोना चांदी, तुझको अभी अनुमान कहाँ-०२
जिसके सर पे हाथ है माँ का, उससे बड़ा धनवान कहाँ-०२
उससे बड़ा धनवान कहाँ-०२
सारे सुख का सार छुपा है, तेरे दर पे जीने में,
मेरे पांव में चुभते कांटे, दुखते तेरे सीने में,
हाँ…
सारे सुख का सार छुपा है, तेरे दर पे जीने में,
मेरे पांव में चुभते कांटे, दुखते तेरे सीने में,
जीवन नैया से जब जब, लहरें आके टकरायी है,
मैया मेरी बांह पकड़ने, नंगे पैरों आयी है-०२
जिसको थामे आठ भुजाएं, उससे बड़ा बलवान कहाँ,
जिसके सर पे हाथ है माँ का, उससे बड़ा धनवान कहाँ,
भूल जा मनवा सोना चांदी, तुझको अभी अनुमान कहाँ,
जिसके सर पे हाथ है माँ का, उससे बड़ा धनवान कहाँ,
उससे बड़ा धनवान कहाँ-०२
यहाँ देखें: श्री दुर्गा चालीसा
तेरा आँचल सर पे मैया, अम्बर बन के ठहरा है,
तेरा मेरा नाता माई, सागर से भी गहरा है-०२
पलकें भींगी जब जब मेरी तू भी तो रोयी मैया,
जगती आँखे देख के मेरी, तू भी कहाँ सोयी मैया-०२
कहाँ ये दुनिया की धन दौलत, और तेरी मुस्कान कहाँ,
जिसके सर पे हाथ है माँ का, उससे बड़ा धनवान कहाँ,
हाँ भूल जा मनवा सोना चांदी, तुझको अभी अनुमान कहाँ,
जिसके सर पे हाथ है माँ का, उससे बड़ा धनवान कहाँ,
उससे बड़ा धनवान कहाँ-०२
