कोई तन्ने कहता राम पुजारी
कोई तन्ने कहता राम पुजारी
कोई कहे शिव शंकर अवतारी,
तेरा भजा जो दर पे ढोल,
बाला जी मने पाशे जान पड़ी,
कोई तन्ने कहता राम पुजारी।।
मेहंदीपुर में रूप निराला,
दीं दुखी का संकट टाला,
ओ भुता पे मारे दोल बाला जी
मने पाछे जान पती,
कोई तन्ने कहता राम पुजारी।।
सालासर में विर्धि अवस्था ,
अपने भगत ने देदे रस्ता
हो तेरा फोटो से अनमोल
बाला जी मने पाछे जान पती,
कोई तन्ने केहता राम पुजारी।।
खेले पल में तेरी बारे में,
संकट फूटे दुख्यारा में,
हो तेरी भगति में न रोल ,
ओ मने पाछे जान पती,
बाला जी मने पाछे जान पती,
कोई तन्ने कहता राम पुजारी।।
राखे असुरा ने दायरे में,
फेमस हो रहा जग सारे में,
रहता खड़े भगत के कॉल,
ओ मने पाछे जान पती,
बाला जी मने पाछे जान पती,
कोई तन्ने कहता राम पुजारी।।
कौशिक भगति के मा खोजा,
सुन के मगन कसुता होजा,
हो अशोक भगत के बोल,
ओ मने पाछे जान पती,
बाला जी मने पाछे जान पती,
कोई तन्ने कहता राम पुजारी।।
