हनुमान कब आओगे समय टल रहा

  • Hanuman Kab Aaoge Samay Tal Raha

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

माता सुमित्रा को अब क्या कहूँगा
उर्मिला की नज़ारो में दोषी रहूँगा
अहम मेरी मर्यादा हाए जल रहा।।

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

पहले पिता ने मुझको वन में पठाया
वन में सिया ने मुझको मुसीबत में डाला।।

लखन माफ़ करना मुझको भाग्या छल रहा
शशि ढाल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

बचपन से अब तक हरदम तेरा साथ पाया
आज आकेला मुझको छोड़ क्यो सताया
जगत विधाता देखो हाथ माल रहा।।

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

ऋण में तुम्हारे लक्ष्मण चुका ना सकूँगा
चलूँगा मैं साथ ऐसे जाने ना दूँगा
हाए कितने जनम का मेरा पाप पल रहा।।

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

रावण की चालो में क्या कपि फस गये है
बड़े वीर बनते थे कहा रह गये है
साद्यंत्रा लगता है कुछ वाहा पल रहा।।

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

इतने में अंजनी लाला उड़ कैसे आए
जड़ी की बात क्या वो पर्वत ले आए
अब सबके मान में आशा दीप जल रहा
अंजनी लाला संकट टला
जय जय राम श्री राम
श्री राम जय जय राम।।

शशि ढल रहा दिल जल रहा
हनुमान कब आओगे समय टल रहा।।

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