माँ शेर पे चढ़के मेरे भी घर चली आना
माँ शेर पे चढ़के
मेरे भी घर चली आना।।
माँ शेर पे चढ़के
मेरे भी घर चली आना।।
बोलो ज्वाला माई की जय हो
दीन हीन कमजोर हू माई
करो सहाइ जैसे गयी
श्री धार के घर में
उसी तरह कन्या रूप में
मेरे घर चली आना।।
माँ शेर पे चढ़के
मेरे भी घर चली आना
जय हो कालिका मैया की।।
घर में तेरी ज्योत जाली माँ
आओ चले माँ साथ में लाना भैरव कालवा
बनवाए है पूड़ी हलवा आके भोग लगाना।।
माँ शेर पे चढ़के
मेरे भी घर चली आना
जैकारा काँगड़ेवाली दा।।
तेरे दरश की आश् लगाके
नैन बिछाके देख कबसे राह तुम्हारी
बनती बज़ारिया राह तुम्हारी।।
माँ शेर पे चढ़के
मेरे भी घर चली आना।।
