ऊँचे पर्वत पे दरबार मैया का

  • Uche Parvat Pe Darbar Maiya Ka

ऊँचे पर्वत पे दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

माँ का सच्चा दरबार जहा झुके संसार
आके पाले तू भी प्यार मैया का

उचे पर्वत पे दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

उँचे पर्वत भवन निराला
गंगा चरण पखारे माँ

पल पल बदले जहा के मौसम
भवन के अजब नज़ारे

गूँजे जैक़रो का शोर
नाचे भवन पे मोर

ऐसा सुंदर है दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

उचे पर्वत पे दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

वैष्णो माँ ने गुफा के अंदर
जाके लगाया डेरा

हरदम भक्तो के रहे मेले
रात हो या सवेरा

भीड़ भवन पे अपार
सबको मिले दीदार

सेवक है संसार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

उचे पर्वत पे दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

श्रद्धा से राकेश जो आता
खाली कोई ना जाता माँ
मन की मुरादे माँ के दर से
हर कोई है पता

भरे भक्तो के भंडार
बाते खुशिया आपर
तू बन जाए सेवदार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

उचे पर्वत पे दरबार मैया का
आके करले तू दीदार मैया का

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