कोई चौकठ पे सिर को झुकाये

  • koi chokath pe ser ko jhukaye

कोई चौकठ पे सिर को झुकाये,
कोई गाये भजन साई बाबा,
वो है सच्चे भक्त जो तुम्हरे चूमते है चरण साई बाबा,

सारी दुनिया से मायूस हो कर आये थे दर पे जो भीख लेने,
है तुम्हारी महोबत में वो भी आज कितने मगन साई बाबा,
कोई चौकठ पे सिर को झुकाये…….

तुमपे बलहार है चाँद तार पाओ आये यहाँ जो तुम्हारे,
बस उसी दिन से शिरडी की धरती बन गई है गगन साई बाबा,
कोई चौकठ पे सिर को झुकाये…..

बात मज़बूरी की आज रख लो मेरी विनती की तुम लाज रख लो,
कह रहा है रो रो के तुमसे एक दुखिया का मन साई बाबा,
कोई चौकठ पे सिर को झुकाये…..

मिल गया है जिहने भी सहारा बो न छोड़ेगे दामन तुम्हारा,
अपने सारे ही भक्तो ने तुमने दी है ऐसी लगन साई बाबा,
कोई चौकठ पे सिर को झुकाये,

कोई करता है रो रो के विनती लाज रखना तुम इन आंसुओं की.
आँसियो के ये मोती नहीं है प्यार के रतन है साई बाबा,
कोई चौकठ पे सिर को झुकाये,

मिलते-जुलते भजन...