झूम उठी है सारी धरती
हे शारदे माँ !
अम्ल धवल गिरी गूँज रही है, वीणा की झंकार-०२
मन के सुने आँगन में, माँ भर दो आज उजियारा।
झूम उठी है सारी धरती, आई बसंत बहार देखो,
आई बसंत बहार माँ, आई बसंत बहार,
पीले पीले पुष्प खिले हैं, महक रहा संसार,
झूम उठी है सारी धरती, आई बसंत बहार।
खेतों में सरसो जो फुले, सोना सा लहराए,
डाल डाल पर कोयल बैठे, मीठे गीत सुनाये,
खेतों में सरसो जो फुले, सोना सा लहराए,
डाल डाल पर कोयल बैठे, मीठे गीत सुनाये,
हवा सुहानी लगे दीवानी, करती माँ का वंदन,
चरणों में हम अर्पित करते, श्रद्धा के सुमन,
झूम उठी है सारी धरती, आई बसंत बहार देखो,
आई बसंत बहार माँ, आई बसंत बहार।
और इस भजन को भी देखें: हे शारदे माँ
सा रे ग म प ध नी सा…
विद्यादायिनी हंसवाहिनी सुर और ताल मिले।
बुद्धिहीन तनु जान के, मैया शरण तुम्हारी आया,
अंधकार अज्ञान का मिटे, मिले ज्ञान की छाया,
बुद्धिहीन तनु जान के, मैया शरण तुम्हारी आया,
अंधकार अज्ञान का मिटे, मिले ज्ञान की छाया,
लेखनी में तुम शक्ति भर दो, कंठ में भर दो अमृत,
तेरी कृपा से हीं माँ शारदे, हो जीवन ये विस्तृत,
जय जय हे जगदम्बे माता, तू हीं है आधार,
झूम उठी है सारी धरती, आई बसंत बहार देखो,
आई बसंत बहार माँ, आई बसंत बहार,
पीले पीले पुष्प खिले हैं, महक रहा संसार।
वीणा वादिनी, वर दे,
वीणा वादिनी, वर दे,
वीणा वादिनी, वर दे।


