जब सब छूट गया तब श्याम मिला

  • Jab Sab Chut Gaya Tab Shyam Mila

हो ओ ओ…
हो ओ ओ…
जब सब छूट गया, तब श्याम मिला,
जब दिल टूट गया, तब श्याम मिला।

एक छोटा सा घर था, सपनों की धुप,
माँ की हंसी थी, पिता का स्वरुप,
बचपन की गलियों में, खुशियां बसी,
पर वक्त की आंधी, सब ले चली,
कभी नौकरी टूटी, कभी रिश्ता गया,
दोस्तों का भी साथ, धीरे छूटता गया,
रातों की छत से, तारे गिनते रहे,
हे भगवान कहकर, आंसू पीते रहे,
जेब में खालीपन, दिल में सवाल,
क्या होगा, बस यही ख्याल,
जब सब छूट गया, तब श्याम मिला,
जब दिल टूट गया, तब श्याम मिला,
हारे इंसान को जिसने थामा,
वो खाटू वाला श्याम मिला।

और इस भजन का भी अवलोकन करें : मैं तेरे बिन कुछ भी नहीं

माँ की आँखों में डर था छुपा,
पिता की ख़ामोशी कुछ कहती थी,
घर में हर दिन बोझ सा लगता,
हंसी कहीं खो सी जाती थी,
कभी मंदिर गया, कभी दर दर भटका,
पर किस्मत का ताला, तब भी ना खटका,
एक दिन माँ बोली रोते हुए,
खाटू चल बेटा, श्याम बुलाते हैं,
जब सब छूट गया, तब श्याम मिला,
जब दिल टूट गया, तब श्याम मिला,
हारे इंसान को जिसने थामा,
वो खाटू वाला श्याम मिला।

थके हुए कदम, टूटे से ख्वाव,
खाटू की गलियों में पहुंचे हम,
लाइन में खड़े थे हजारो लोग,
हर चेहरे पर लिखा अपना रोग,
जब पहली बार दर्शन पाए,
आंसू बिना पूछे बह आये,
कुछ माँगा नहीं, बस सर झुकाया,
सारा दर्द श्याम को सौंप आया,
घर तो वही था, हालात वही,
पर दिल के अंदर, कुछ बदल गया,
डर की जगह, उम्मीद जगी,
अँधेरी रात में, सूरज उग गया,
धीरे धीरे राहें, खुलने लगीं,
छोटी सी नौकरी, फिर से मिली,
माँ की दवा, पिता की हंसी,
घर में लौटी, फिर से रौशनी,
जब सब छूट गया, तब श्याम मिला,
जब दिल टूटा गया, तब श्याम मिला,
हारे इंसान को जिसने थामा,
वो खाटू वाला श्याम मिला।

जो हारा है जो थक गया,
जो जिंदगी से लड़ गया,
वो एक बार श्याम के दर जाए,
फिर देखे कैसे मुकद्दर बदल जाए,
जब सब छूट जाए, जब दिल रो जाए,
तब खाटू वाला श्याम बुलाये,
हारे का सहारा, जीवन का काम,
मेरी हर सांस में श्याम का नाम।


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