माया का लोभी मत कर अभिमान

  • maya ka lobhi mat kar abhiman

माया का लोभी मत कर अभिमान
मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया रे जसी तरुवर की छाया
या माया को पार नी पाया
कभी लग छाव भैया कभी लग घाम
मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया म जो उलझाया
जो पड़या फंद एका खूब पछताया
पड़ दुख भारी फिर रोव सुबह शाम
मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया छे जगत ठगोरी
रावण न सीता ख चोरी
मिटी गयो जेको भाई नामो रे निशान
मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

https://youtu.be/qD875eQ6KxY

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