तुलसीजी का ब्याह

  • TulsiJi Ka Byah

पांच जनी के झूम के तुलसी पानी ने चाली ओ राम।
संग की सहेली यूं कहें तुलसा ओड क्वारी ओ राम ।।
सिर की गगरया धूं पट की तुलसा। ठिनकत आई ओ राम।
के बेटी तने भूत डेराइये के तू अलसेड़े में आई ओ राम।
संग की सहेली यूं कहे तुलसा ओड क्वारी ओ राम।
ओ बेटी तने श्री कृष्ण बर ढूंढा ओ राम।
कही बेटी तने, शिव जी प्रणाम ओ राम।
शिवजी मेरे बाबुल धूनी रमावें, लटाएं बखेरे ओ राम।
कहो बेटी सूरज प्रनामा ओ राम।
सूरज मेरे बाबुल तपेए घनेरा कहो नारद प्रनामा ओ राम।नारद मेरे बाबुल धूम मचावे ओ राम।
बारह बरस बाबा नेम निभावां जबरे श्रीकृष्ण पावां ओ राम।
सावन में मेरे बाबुल हरा न खाया तो भादों में दही न खाई ओ राम।
आसोज में मेरे बाबुल दूध न पीवा ओ राम।
कार्तिक में मेरे बाबुल घी न खावां ओ राम।
मंगसिर में मेरे बाबुल मांग न भरी तो पोहे में सोढ़ न ओड़ी ओ राम।
माह में माजल नहाई ओ राम।
फाल्गुन में मेरे बाबुल फगवा न खेली ओ राम।
फाल्गुन में मेरे बाबुल फगवा न खेली ओ राम।
चैत में मेरे बाबुल चिंता उपाई ओ राम।
बैसाख में मेरे बाबुल आक भी सींचा ओ राम।
जेठ में मेरे बाबुल जेठुरा भराया ओ राम।
आसाढ़ में मेरे बाबुल बंगला न साई ओ राम।
बारह बरस नेम निभाया ओ राम जबरे कृष्णवर पाया ओ राम।
जो हमारी तुलसारा ब्यावल गावें जो जन्म मरण छूट जावें ओ राम।
बाली गावें घर वर पावें तो तरनी पुत्र खिलावें ओ राम।
ओ राम बुढ़ी गावें जमुना नहावें तो स्वर्ग पालकी आवें ओ राम।

मिलते-जुलते भजन...