उनके हाथों में लग जाए ताला
जय हो!
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए,
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए,
अरे उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए।
माता के दरबार में देखो, भीड़ लगी है अपार-०२
जो माता की जय ना बोले, जय हो,
जो माता की जय ना बोले, उनको है धिक्कार,
उनकी जिह्वा में, उनकी जिह्वा में,
उनकी जिह्वा में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया के जयकारे ना लगाए,
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए।
इस प्यारी से भजन का भी रसपान करें: अड़हुल के फूल
माँ की मूरत ममता वाली, पावन दिव्य स्वरुप-०२
अरे सामने आके जो ना देखे, जय हो,
सामने आके जो ना देखे, माँ का प्यारा रूप,
उनकी आँखों में, उनकी आँखों में,
उनकी आँखों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो माँ के दर्शन को ना जाए,
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए।
माँ के द्वारे आये लेकिन, कभी झुके ना शीश-०२
अरे ऐसे लोगों को अम्बे का,
ऐसे लोगों को अम्बे का, कहाँ मिले आशीष,
इनके मस्तक पे, इनके मस्तक पे,
इनके मस्तक पे लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो माँ के आगे शीश ना झुकाये,
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए।
ढ़ोल नगाड़े ढ़म ढ़म बाजे, जयकारे की धूम-०२
यहाँ खुशी में कोई निरंजन, जय हो,
यहाँ खुशी में कोई निरंजन, अगर ना जाए झूम,
उनके पैरों में, उनके पैरों में,
उनके पैरों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो आज खुशी में नाच ना पाए,
उनके हाथों में लग जाए ताला,
अलीगढ़ वाला सवा मन वाला,
जो मैया जी की ताली ना बजाए-०४
